अब UPI पेमेंट होगा और आसान: फिंगरप्रिंट/फेस ID से करें फ़ास्ट सुरक्षित लेनदेन

नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने UPI पेमेंट को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अब उपयोगकर्ता बिना PIN डाले सिर्फ अपने फिंगरप्रिंट या फेस आईडी के ज़रिए भुगतान कर सकेंगे।

UPI पेमेंट का यह फीचर कब शुरू हुआ और क्यों लागू किया जा रहा है

यह नया फीचर 8 अक्टूबर 2025 से पूरे देश में लागू हो गया है। इस पहल को नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) द्वारा शुरू किया गया है, ताकि डिजिटल लेनदेन को और अधिक सरल, तेज और सुरक्षित बनाया जा सके।

भारत में UPI (Unified Payments Interface) आज सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुकी है। वर्तमान में देश की होने वाले कुल लेनदेन में से लगभग 85 प्रतिशत इसका मतलब भारत में हर महीने 25 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक का लेनदेन ऑनलाइन सर्विसों के जरिए किया जाता है। इन्हीं आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए यह नई प्रणाली लागू की गई है, ताकि बढ़ती डिजिटल गतिविधियों में सुरक्षा और सुविधा दोनों को और मजबूत किया जा सके।

यह बदलाव देश के आधार (Aadhaar) सिस्टम में मौजूद बायोमेट्रिक डेटा के माध्यम से संभव हुआ है। इसके तहत उपयोगकर्ता अब बिना पिन डाले केवल फिंगरप्रिंट या फेस आईडी के जरिए भुगतान कर सकते हैं। इससे भुगतान प्रक्रिया न केवल और तेज बनेगी बल्कि अधिक सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल भी हो जाएगी।

नई प्रणाली कैसे काम करेगी

नई UPI बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन प्रणाली उपयोगकर्ताओं को पारंपरिक पिन की जगह फिंगरप्रिंट या फेस आईडी से भुगतान करने की सुविधा देती है। यह सुविधा पूरी तरह वैकल्पिक है, यानी जो चाहें वे पुराने पिन आधारित सिस्टम का उपयोग जारी रख सकते हैं। नया सिस्टम आधार (Aadhaar) से जुड़ा है और UIDAI द्वारा संग्रहीत बायोमेट्रिक डेटा के माध्यम से पहचान की पुष्टि करता है। अधिकतर प्रमाणीकरण प्रक्रिया उपयोगकर्ता के स्मार्टफोन में ही होती है, जिससे डेटा गोपनीयता बनी रहती है। शुरुआत में लेनदेन की सीमा 5,000 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन तय की गई है। इसके साथ ही, अब उपयोगकर्ता आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन से अपना UPI पिन सेट या रीसेट कर सकेंगे। डिवाइस बदलने या नया बायोमेट्रिक जोड़ने पर “ताज़ा सहमति” देना आवश्यक होगा, ताकि सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों बनी रहें।

इस नए नियम के फायदे

UPI में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन लागू होने से डिजिटल भुगतान प्रणाली में कई महत्वपूर्ण फायदे देखने को मिलेंगे। सबसे बड़ा लाभ सुविधा का है — अब उपयोगकर्ताओं को हर बार PIN याद करने या टाइप करने की ज़रूरत नहीं होगी; केवल फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान से ही भुगतान किया जा सकेगा। इससे लेनदेन प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज़ और सहज बनेगी।

इस बदलाव से फ्रॉड और धोखाधड़ी के मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि PIN चोरी या फिशिंग जैसे जोखिम काफी घट जाएंगे। साथ ही, यह प्रणाली उन लोगों के लिए भी उपयोगी साबित होगी जो डिजिटल तकनीक में बहुत निपुण नहीं हैं, जैसे बुजुर्ग या ग्रामीण उपयोगकर्ता।

बायोमेट्रिक डेटा की अद्वितीयता इसे अत्यधिक सुरक्षित बनाती है, जिससे नकल या गलत उपयोग लगभग असंभव हो जाता है। यह कदम न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को एक और उन्नत, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाएगा।

चुनौतियाँ और सवाल

UPI में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन लागू होने के साथ कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चिंता डेटा गोपनीयता की है, क्योंकि अगर बायोमेट्रिक जानकारी लीक हो जाए तो उसे बदला नहीं जा सकता। इसके अलावा, कभी-कभी फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन सही से काम न करने पर उपयोगकर्ता को दिक्कत हो सकती है, इसलिए बैकअप के रूप में PIN प्रणाली जरूरी रहेगी। सभी स्मार्टफोन इस तकनीक को सपोर्ट नहीं करते, जिससे ग्रामीण या कम संसाधन वाले उपयोगकर्ता सीमित रह सकते हैं। साथ ही, नेटवर्क समस्या और तकनीकी गड़बड़ियाँ भी चुनौती बन सकती हैं। उपयोगकर्ताओं में विश्वास बढ़ाने और विवादों से निपटने के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा और मजबूत सुरक्षा प्रणाली आवश्यक है।

एक और महत्वपूर्ण सवाल यह भी आता है: यदि कोई व्यक्ति आपके सोते समय आपका फ़ोन उठाकर फिंगरप्रिंट या फेस से अनलॉक कर दे, तो क्या वह भुगतान कर सकता है? इस खतरे को कम करने के लिए उपायों की आवश्यकता है — जैसे ऑन-डिवाइस लिवनेस-डिटेक्शन (जो केवल जीवित चेहरे/अंगुली स्वीकार करे), मजबूत स्क्रीन-लॉक और ऑटो-लॉक सेटिंग्स, छोटे-छोटे लेनदेन-सीमाएँ, तुंरत ट्रांज़ैक्शन नोटिफिकेशन, तथा किसी संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्टिंग और त्वरित ब्लॉक सुविधा। इन तकनीकी और नीतिगत रक्षा तंत्रों के बिना उपयोगकर्ता सुरक्षा में सेंध लग सकती है, इसलिए इन्हें लागू करना अनिवार्य होगा।

डिस्क्लेमर:यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और सरकारी घोषणाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी वित्तीय निर्णय या लेनदेन से पहले अपने बैंक या UPI सेवा प्रदाता से नवीनतम और सत्यापित जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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